Suspense thriller story
एक जंगल था जंगल मे बीचो-बीच एक शिवजी का मंदिर था शिवजी का पूरा मंदिर काले पत्थरों से बनाया गया था आज तक कोई नहीं जानता कि यह मंदिर कितना पुराना है जंगल मे रहने वाले लोग बहुत मानते थे शिव जी को हर साल शिव जी के मंदिर मे उत्सव होता था यह कोई ऐसा वैसा उत्सव नहीं था इस उत्सव मे शिवजी खुद आते थे धरती पर उत्सव मनाने जिस उत्सव मे खुद शिवजी हो वह उत्सव कभी मामूली नहीं हो सकता जंगल मे रहने वाले लोग मानते थे कि यह ब्रह्मांड का सबसे खूबसूरत उत्सव है यह उत्सव रात को मनाया जाता है जंगल के सभी लोग रात को मंदिर के अंदर जाते थे और शिवलिंग के सामने खड़े हो जाते थे मंदिर के पुजारी आरती शुरू करते थे आरती शुरू होने के बाद शिवलिंग पर एक पत्थर था काले कलर का वह पत्थर की रोशनी पूरे जंगल मे फैल जाती थी
उस पत्थर मे से इतनी रोशनी निकलती थी कि सूरज की रोशनी भी उसके सामने फीकी पड़ जाए गांव के लोग मानते थे की पत्थर मे से रोशनी निकालने का मतलब है कि अब शिवजी खुद आएंगे आरती खत्म हो जाने के बाद सभी गांव वाले हाथ मे मसाले लेकर खड़े हो जाते थे और पुजारी में खुद शिवजी आते हैं और तांडव शुरू करते हैं
तांडव पूरी रात चलता है सुबह की पहली किरन होते ही शिवाजी अपना तांडव रोकते हैं और अपने जीतने रूद्र रूप हे वो सभी दिखाते हैं और सभी गांव वाले शिव जी के पैरों मे नमन करते हैं
तभी शिवजी बोलते हैं
शिवजी(पुजारी):-तुम सब ऐसे ही साथ मिलकर रहना और आज कुछ होने वाला है जो पहले कभी नहीं हुआ
इतना बोलते हीं शिवजी चले गए सभी लोग सोच मे पड़ गए की शिव जी ने ऐसा क्यूं कहा कि आज कुछ होने वाला है
तभी बहार से एक लड़का आता है मंदिर मे और कहता है कि जंगल में कुच गाड़ी आ रही है सभी गांव वाले डर गए उन्हें लगने लगा कि शिवजी की बात सच हो रही है और उस तरफ सभी जाने लगे जहां से गाड़ी आ रही थी सभी गांव वाले रास्ते में खड़े हो गए तभी ट्रक,ट्रैक्टर,जेसीबी,क्रेन,बाइक,फोरव्हील सभी गाड़ि रुक गई गाड़ी मे से कुछ लोग बाहर निकले किसी के हाथ मे तलवार थी किसी के हाथ मे हथोड़े थे
एक ने कहा हट जाओ हमारे सामने से
जंगल वासी भी कहने लगे कि कुछ भी हो जाए लेकिन हम तुम्हें पेड़ नहीं काटने देंगे सामने जो मेंन था विरंगा उसने कहा कि हम पेड़ काटने नहीं आए हैं जंगल मे रहने वाले जो सबसे बुजुर्ग थे हितेंद्रजीत उन्होंने पूछा तो तुम क्यों आए हो यहां पर
विरंगा:- तुम्हारे जंगल मे एक शिव का मंदिर है हम उसे तोड़ने के लिए आए हैं
इतना सुनते ही सभी जंगल वासी भड़क उठे
हितेंद्रजीत:- ऐसे कैसे तुम हमारे भगवान शिव जी का मंदिर तोड़ोगे हमारे देव है वो
विरंगा:- इतना भड़कने की जरूरत नहीं है तुम सब जितने पैसे चाहिए उतने पैसे मिलेंगे जो चाहोगे वह मिलेगा बस हमें यह मंदिर तोड़ने दो
हितेंद्रजीत:- अपने पैसे अपने पास रखो नहीं चाहिए हमें तुम्हारे पैसे हमारे पास देव है तो सब कुछ है शिवजी के बिना हमारे गले से उतरने वाला पानी शिवजी के गले के विश से भी ज्यादा नुकसानदायक है
विरंगा:- तो फिर तुम्हारी मौत का कारण तुम्हारा देव बनेगा
हितेंद्रजीत:- मेरे देव की मे जितनी सेवा करूं उतनी कम है और मेरे देव के लिए मै जितना बलिदान दु उतना कम है
वीरंगा :-मुझे लगता है कि तुम्हें मौत से कुछ ज्यादा लगाव है ठीक है मै तुम्हें तुम्हारे देव के पास भेज देता हूं
फिर लड़ाई शुरू हुई दोनों तरफ लासे गिरने लगी लेकिन जंगल वासी बहुत कम थे और वह दूसरे लोग बहुत ज्यादा थे इसलिए सभी जंगल वासी को मार दिया जंगल मे कोई बचा नहीं उस जगह के सभी पत्थर और पेड़ खून से लाल हो गए थे
फिर वीरंगा और उनके साथी मंदिर की तरफ बढ़ने लगे मंदिर के बहार पहुंचने के बाद
वीरंगा:- तोड़ दो इस मंदिर को उसके बाद हम हो जाएंगे ख़रब पति इतना पैसा होगा कि हम कुछ भी खरीद लेंगे कुछ भी
तभी मंदिर के अंदर से पुजारी बहार आए
पुजारी:- मंदिर को तोड़ने की गलती कभी मत करना चले जाव यहां से
वीरंगा:- क्यु अब तुम रोकोगे हमे
पुजारी:- हां मै रोकूंगा तुम्हें
वीरंगा:- तुम्हारे पहेले जंगल के कुछ लोग आए थे हमे रोकने अब उनकी लाशे जंगल के रास्ते मे गिरी हुई है जाकर उठा लेना और रास्ता साफ कर देना हमको वापस भी जाना है
पुजारी (चिल्लाये):- यह तुमने घोर पाप किया है यह पाप तुम्हें मरने के बाद भी शांति नहीं देगा नहीं तुम्हें मरने के बाद नया शरीर मिलेगा और ना ही तुम्हें मोक्ष मिलेगा यह मेरा तुमसे वचन है
वीरंगा:- तुम बोलोगे और सच हो जाएगा ये मे कैसे मान लूं
पुजारी:- क्योंकि यह पुजारी की जुबान नहीं है यह जुबान मे से निकला हुआ हर एक शब्द ब्रह्मांड को एक नया रूप देता है एक नया परिवर्तन लाता है ये वो है जिस साप से लोग डरते हैं उस सांप को गले लगाते हैं जिस राख को लोग छूटे भी नहीं उसे यह अपनी बाजुओं मे लगाते हैं इंसान गंदा पानी भी नहीं पीना चाहते लेकिन यह जहेर पीकर बैठे हैं यह शिवजी की जुबान है कभी गलत नहीं हो सकती
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तभी पुजारी के अंदर शिवजी आ चुके थे और अपना काल भैरव वाला रूप धारण करते हैं
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वीरंगा और उनके साथी दर से कापने लगे थे और डर के मारे जंगल मे भागने लगे काल भैरव के एक हाथ मे त्रिशूल था और दूसरे हाथ मे परशु काल भैरव गायब हो गए और जिस तरफ वह लोग भाग रहे थे वहां प्रगट हो गए और त्रिशूल से और परशु से सभी लोगो के सर काटने लगे एक-एक करके काल भैरव ने सभी को मौत के घाट उतार दिया उसके बाद काल भैरव शांत हुए और अपनी आखें बंद की काल भैरव आखें खोलते उससे पहले सभी जंगल वासी की आख खुल गई और सभी खड़े हो गए और अपने बदन पर लगे हुए घाव देखने लगे तो किसी के बदन पर कोई घाव नहीं था तभी सभी ने देखा कि महादेव के रूद्र रूप काल भैरव खड़े हे
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और सभी देखकर चौंक गए की काल भैरव के पूरे बदन पर खून था पैर के अंगूठे से लेकर मुंह तक हर जगह पर खून था पूरा शरीर घाव से भरा हुआ था
जितेंद्रजीत:- प्रभु आपको कौन मार सकता है आपके शरीर पर घाव कैसे आ सकते हैं
काल भैरव:- तुम लोगों के शरीर पर जो घाव थे वो मैने ले लिये है और ऐ घाव मुझे तकलीफ नहीं आनंद दे रहे हैं क्योंकि यह मेरे प्यारे भक्तों के घाव है
और सभी लोग काल भैरव के पैरो में पड़ गए तभी काल भैरव चले गए
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