Hello मेरे यारो मेरा नाम दर्शन है मैं हमेशा आपके लिए interesting story लिखता हूं और लिखता रहूंगा of course आपको मेरी ये स्टोरी भी पसंद आयेगी
गांव के दो भड़वार|interesting funny story
एक गांव था गांव का नाम 'भड़वापुर' था गांव में दो ही भड़वार रहते थे एक का नाम 'मोहनलाल' था दूसरे का नाम 'सोहमलाल' था दोनों एक दूसरे के जानी खतरनाक दुश्मन थे और उन दोनों का घर एक दूसरे के सामने था दोनों का काम एक ही था पूरा दिन 'बकरी' चराना मोहनलाल की बकरीया 'काली' थी और सोहमलाल की बकरियां 'सफेद' थी एक दिन सुबह-सुबह मोहनलाल अपनी बकरियों को नहेला रहा था तभी एक जबरदस्त हवा का जोका आया तभी मोहनलाल एक बकरी को नहेला रहा था और वह बकरी हवा का झोंका आने के कारण मोहनलाल पर गिर गई और तभी बकरी ने मोहनलाल के मुंह पर 'टट्टी' कर दी
मोहनलाल ने बकरी को गुस्से में थप्पड़ मारा और साइड में फेंक दिया फीर मूंह धोने चला गया दूसरी तरफ सोहम लाल अपनी 'बनियान' 'धोती' और 'कच्चे' धो रहा था 'बाथरूम' में अब कपड़े धोने के बाद सोहमलाल के पास कपड़े सुखाने की जगह नहीं थी इसलिए वह मोहनलाल के घर की जो पाली थी वहां कपड़े सुखा कर आ गया मोहनलाल अपना टट्टी वाला मुंह धो कर बाहर आया तो उसने देखा कि पाली पर किसी ने कपड़े सुखाये हैं तो मोहनलाल ने कपड़े हाथ में लेकर देखा तो पता चल गया कि यह कपड़े सोहम लाल के है यह बात पता चलने पर मोहनलाल का 'मुंह' 'टमाटर' के मुंह से ज्यादा 'लाल' हो गया गुस्से में मोहनलाल बनियान चड्डी और लूंगी लेकर सोहमलाल के घर गया घर जाकर जोर से चिल्लाया
मोहनलाल:-कमीने 'नंगे' भड़वे सोहम बहार निकल
सोहमलाल के 'छोटे-छोटे' कानो में 'बड़े-बड़े' शब्द गए और सोहमलाल का मुंह 'तरबूज' से भी ज्यादा 'फुल' गया और फुले हुए मुंह के साथ सोहमलाल घर के बाहर आया और बोला
सोहमलाल:- बोल बकरे के 'लींडे' जैसे दिखने वाले इंसान क्या काम है
मोहनलाल:-'गधे' की 'गांड' जेसे दीखने वाले इंसान तूने मेरी पाली पर अपनी चड्डी बनियान और धोती क्यों 'सुखाइ' बोल
सोहमलाल:- क्योंकि मेरे पास ऐसी जगह नहीं है जहां अपने 'अच्छे' कपड़े 'ब्रांडेड' कपड़े सुखा सकूं
मोहनलाल:- अगर कल तेरे घर 'संडास' नहीं होगा तो क्या मेरे घर 'हंगने' के लिए आएगा
सोहमलाल:- बिल्कुल हंगूगा तुम्हारे घर और धोऊंगा मेरे घर आकर इससे तुम्हारा पानी भी बच जाएगा
मोहनलाल:- साले तेरा बहुत हो गया है अब तेरे ही सामने तेरे कपड़े मे फाड़ दूंगा
सोहमलाल:-अगर तूने मेरे कपड़े फाड़े तो तेरी बकरी का मुंह काट डालूंगा और वह कटा हुआ मुंह तेरे मुंह पर लगा दूंगा ताकि तेरा मुंह थोड़ा अच्छा दीखे
मोहनलाल:- में तेरी बकरी के चारों पैर काटकर तेरे मुंह में डाल दूंगा ताकि तेरा बोलना बंध हो जाए
सोहमलाल:- हो जाए दो दो हाथ देखते हैं कौन 'जीता' है
मोहनलाल:- देखते हैं कौन जीता है कल आ जाना शाम को 5:00 बजे रोड पर
शाम के 5:00 बजे
मोहनलाल और सोहमलाल दोनों रोड पर आ गए थे अपनी बकरियों को लेकर आज होगी एक अनोखी लड़ाई देखते हे कौन सा बकरा जीता है
सोहमलाल:- हमला करो मेरी प्यारी बकरियों इसकी बकरियों को छोड़ना मत सबकी फाड़ के रख देना
मोहनलाल:- हमला करो मेरी जांबाज बकरियो अपने सिंग से उनके शरीर में इतने हॉल कर देना कि कंफ्यूज हो जाए कि कहां से टट्टी करें और कहां से मुते
सभी बकरियां आपस में कुछ इस तरा लड़ रही थी जिस तरा कुत्ते के दो बच्चे लड़ रहे हो और दूसरी तरफ सोहमलाल और मोहनलाल अपने घर से तलवार लेकर आए थे और उसे लड़ रहे थे गांव के लोगों ने इनको लड़ते देखा और सोचा कि उनके बीच में जाते हैं जगडा रुकवाने के लिए सभी गांव वाले बीच में कूद पड़े तो सभी बकरी गांव वालों को मारने लगी तो गांव वाले भी लड़ने लगे और एक दूसरे को मारने लगे और थोड़ी देर लड़ाई चली और फिर थक कर सभी लोग अपने अपने घर चले गए
कहानी पढ़ने के लिए शुक्रिया आपका
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