Story lava inside the village
एक छोटा सा गाव था गाव का नाम पिपलापुर था पिपलापुर जिस जगह था उसके आस पास ज्वालामुखी थे
मेरा नाम दर्शन है कहानी शुरू करते है
इसलीए वहा के लोगो ने पिपलापुर के आस पास बड़ी दिवाल बनवायी थी ताकि लावा गाव मैं ना आसके लेकिन इसका उल्टा हुआ
एक दिन जितने भी ज्वालामुखी थे सभी मेसे लावा बहार नीकलने लगा था लावा गांव की दिवाल के पास पहुंच गया था लावा दीवाल को छुते ही दीवाल पीगलने लगी थोड़ी देर में पूरी दीवाल पीगल गई
अब लावा चारो तरफसे बडी तेजी से गांव की तरफ आ रहा था सभी गांव वाले साथ मैं भागने की तयारी कर रहे थे लेकिन लावा इतना नजदीक आ चुका था कि घर पर से लावा जा रहा था
लेकिन अच्छी बात ये है कि गांव वाले घर से निकल कर एक बड़ी पहाड़ी पर चलेगए थे सभी गांव वाले पहाड़ी पर थे
सरपंच:- मुझे लगता है कि यह लाव ठंडा होने में पता नहीं कितना समय लेगा लेकिन तब तक हमें इस पहाड़ी पर ही रहेना होगा
सरपंच की पत्नी:- अगर हम पहाड़ी पर आएंगे तो सुबह-सुबह भैंस का दूध कौन निकालेगा बोलिए
(गांव के लोग एक साथ हंसते हैं)
सरपंच(गुस्से में):- मुझे एक बात बता इस वक्त हम कहां है
सरपंच की पत्नी:- कमजोर है आपका दिमाग इसलिए मैं कहती हूं बादाम खाया करो इस वक्त हम पहाड़ी पर है
सरपंच (गुस्से में):- हम पहाड़ी पर है तो नीचे क्या है
सरपंच की पत्नी:- क्या आप भी नीचे तो लाव है
सरपंच (गुस्से में):- ओर तुम्हारी भैंस कहां है
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सरपंच की पत्नी:- भेंस तो नीचे O MY GOD
भैंस तो मर गई होगी लावा में
सरपंच (गुस्से में):- तो फिर दूध निकालने के लिए तुम्हारे पास भेंस बची नहीं इसलिए चुप रहो
सरपंच की पत्नी को छोड़कर सभी गांव वाले परेशान थे कि अब क्या करें
सरपंच:- जब तक लावा ठंडा ना हो जाए तब तक हमें इस पहाड़ी पर ही रहना होगा इसके अलावा हमारे पास और कोई दूसरा रास्ता नहीं है
1 Month Later
1 महीने तक पहाड़ी पर रहने के बाद
सरपंच:- अब तक लावा ठंडा हो गया होगा हम नीचे चलते हैं
सभी गांव वाले पहाड़ी से उतरने लगे लेकिन गांव वालो को पता नहीं था की वह पहाड़ी से उत्तरकर अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती कर रहे हैं
लावा में सभी घर का सत्यानाश हो गया था इसलिए सभी गांव वाले मिलकर रहने के लिए नया घर बनाने लगे
घर बनने के बाद गांव वाले वापस पहले की तरह रहने लगते हैं लेकिन अब क्या होने वाला था उसका गांव वालों को थोड़ा सा भी अंदाजा नहीं था सबको लग रहा था कि लावा से हम बच गए
लेकिन लाव में से एक रासायनिक धुवा निकलने लगा वह धुवा इतना जहरीला था की धीरे-धीरे गांव के सभी लोग बीमार पड़ने लगे गांव के पास में एक नदी थी वह भी जहरीली नदी बन गई
वह धुआ आसमान में इतना फैल गया कि वहां से जो पक्षी उड़ कर जाते थे उनकी सांस में लावा का जहरीला धुआं आने के कारण मौत हो जाती थी
धीरे-धीरे गांव के लोग मरने लगे और आखिर में वही हुआ जिसका दर था पूरा गांव शमशान में बदल गया
कैसी लगी आपको हमारी कहानी lava inside the village comment में जरूर बताना.





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