नारद जी पृथ्वी लोक पर आए थे लक्ष्मी जी ने ही नारद जी को पृथ्वी पर भेजा था किसी को कुछ देने के लिए नारद जी रास्ते पर चलके जा रहे थे तभी एक लुटेरा आया मेरा नाम दर्शन है और कहानी शुरू करते हैं
Valmiki Jayanti 2024: maharishi valmiki real life story in hindi
लुटेरा:- तुम्हारे पास ये पोटली है वो मुझे दे दो
नारद जी: मैं तुम्हें ये पोटली नहीं दे सकता, इसपर तुम्हारा हक नहीं है
लुटेरा:मैं दुसरे के हक का ही में खाता हूं ये मेरी मजबूरी नहीं मेरी आदत है
नारद जी:- मेरी भी एक आदत है कि कोई मुझसे मांगता है कुछ भी तो मैं देता हूं लेकिन वही देता हूं जिसकी वो इन्सान कदर करता हो और तुम पोटली की कदर तो नहीं करते ओर तुम इसके लायक भी नहीं हो
लुटेरा:- मेरी एक बुरी आदत है अगर कोई मुझे कुछ देने को मना करता है तो मैं उसे मार डालता हूं और वह सब कुछ ले लेता हूं जो मुझे चाहिए
नारद जी:- ये सब तुम किसके लिए करते हो
लुटेरा:- मेरे परिवार के लिए करता हूं मैं
नारद जी:- तुम्हारे परिवार को पता है कि तुम उनके लिए लोगो को मारते हो और मारने के बाद उनका सामान ले लेते हो
लुटेरा:- हा मे क्या करता हूं वो सब मेरे परिवार को पता है
नारद जी:- तो तुम्हें मना नहीं करते कि ये गलत काम है नहीं करना चाहिए
लूटेरा:- नहीं मुझे कोई मना नहीं करता
नारद जी:- मुझे तुम्हारे परिवार से मिलना है
फिर लुटेरा नारथ जी को अपने परिवार से मिलने ले जाता है
लुटेरा:- ये मेरी पत्नी है और ये दोनों मेरे बेटे हैं
नारद जी लुटेरे की पत्नी को पूछते हैं
नारद जी:- आपका आपकै बच्चों का पेट भरने के लिए ये आपके पति कितने लोगो को मार चुके है लुट चूके हे ओर आप ईन्की पत्नी हे तो इसने जो पाप किया है आपके लिए वह पाप आप अपने सर पर लोगी
लूटेरे की पत्नी:- नहीं पाप तो इन्होंने किया है लोगों को लूटा तो इन्होंने है तो इनके पाप के भागीदार हम क्यों बने
ये बात सुनकर लुटेरे की आँखों में आशु आ जाते हैं फिर नारथ जी लुटेरे को घर के बाहर लेकर जाते हैं
नारद जी:- देख लिया ना तुमने तुम जिसका पेट भरने के लिए पाप कर रहे थे उन्होंने तुम्हारा साथ छोड़ दिया इस दुनिया में अपने भी अपने नहीं होते अगर तुम सर्वश्रेष्ठ बन जाओ तो पराए भी अपने हो जाते हैं
लुटेरा नारथ जी के पैरों में पड़ जाता है और ऊंची आवाज में कहेता है
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लुटेरा:आज से मैं दुनिया के सारे बंधन तोड़ता हूं आज से मेरा किसी के साथ कोई संबंध नहीं है और संबंध है तो सिर्फ ईश्वर के साथ मोह माया लोभ इन सब का मे त्याग करता हूं
उस दिन के बाद से लुटेरा अकेला रहने लगा एक संन्यासी बन गया एक गुफा में रहने के लीए चला गया सन्याशी बनने के बाद उनका नाम वाल्मीकी रुशी नाम पड़ा वाल्मीकी रुशी को भारत में हर कोई जनता है जिस वक्त किसी ने भी रामायण शब्द भी नहीं सुना था उस वक्त वाल्मीकि ऋषि ने पूरी रामायण लिख दी
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Question
1.पोटली में क्या होगा क्या लगता है आपको
2. वाल्मीकि ऋषि ने क्या सोचकर सबकुछ त्याग कर दिया
3. आपको क्या सीखने को मिला इस कहानी से
आपको कैसी लगी Valmiki Jayanti 2024: maharishi valmiki real life story in hindi






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