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| Beautiful girl |
मेरा नाम दर्शन है ये कहानी है उस वक्त की जब दुनियां की पहली स्त्री का जन्म हुआ था ये कहनी आपको जरूर अच्छी लगेगी कहानी सुरु करते है
उस वक्त की बात है जब ईश्वर ने पृथ्वी का निर्माण किया था पृथ्वी का निर्माण करने के बाद ईश्वर एक बड़े मैदान में बैठे थे और अपने आसपास के अपने बनाए हुए पर्वत को फूलों को बादल को सूर्य को देख रहे थे और अंदरो अंदर मुस्कुरा रहे थे क्योंकि उन्हें यह सब देखकर बहुत ही अच्छा लग रहा था लेकिन ईश्वर को लगा कि
ईश्वर:- यह ग्रह छोटा बनाया है मैंने लेकिन कितना खूबसूरत है ओर कितनी खूबसूरत है यह छोटी सी जगह और मेरा यह बनाया हुआ छोटा सा गोला मुझ तक सीमित नहीं रहना चाहिए मुझे किसी और को भी दिखाना चाहिए
उसके बाद ईश्वर कुछ ऋषि का निर्माण करते हैं
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Sage |
ऋषि:- प्रणाम प्रभु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने हमें जीवन दिया क्या आगया है बोलीए प्रभु
ईश्वर:- तुम सबको मिलकर ऐसे जीव की रचना करनी है जिसका जन्म तो एक छोटी सी जगह में हो लेकिन उस जगह से बाहर निकल कर वह मेरी बनाई हुई हर जगह को देख सके उसे समझ सके उसे महेसूस कर सके और अपने जीवन को एक नया रूप दे सके और याद रखना उसकी आयु सीमित होनी चाहिए
ऋषि:- लेकिन आयु क्यू सीमित होनी चाहिए प्रभु
ईश्वर:- क्योंकि यह पूरा ब्रह्मांड मैंने बनाया लेकिन ब्रह्मांड में एक भी ऐसी वस्तु मैंने ऐसी नहीं बनाई
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| Space |
जिसकी आयु सीमित ना हो यहां तक की तुम सब ऋषि की आयु भी सीमित है और सबसे जरूरी बात उस जीव मैं भावना होनी चाहिए
ऋषि:- आप जीव मैं भावना ए क्यों डालना चाहते हैं बिना भावना डालें भी आप जीव बना सकते हैं ना
ईश्वर:- जीस जीव में भावनाएं ना हो वह बादल जैसा है बादल हर जगह पर घूमते हैं दुनिया में हर जगह पर जाते हैं लेकिन बादल को उन जगह के लिए कोई भावनाएं नहीं है बिल्कुल महत्व नहीं है इसलिए बादल का जन्म सिर्फ पानी बरसाने के लिए ही मैंने किया है
ऋषि:- हम समझ गए प्रभु आपके हर एक शब्द हम समझ गए लेकिन प्रभु हम कौन सी भावनाएं डालें
ईश्वर:- सबसे पहले तो प्यार की भावना डालो उसके बाद क्रोध की भावना डालो उसके बाद विश्वास की भावना डालो उसके बाद विश्वास घाट की भावना डालो उसके बाद मोह माया की भावना डालो उसके बाद ईर्षा की भावना डालो उसके बाद शारीरिक संबंध आधारित भावनाएं डालो
ऋषि:- सभी भावनाएं जीव में हम डालेंगे लेकिन यह शारीरिक संबंध भावना क्यों प्रभु यह तो गलत है
ईश्वर:- नहीं गलत नहीं है सबसे सही यही है अगर यही भावना जिव में नहीं होगी तो दूसरा जीव कैसे आएगा इसलिए यह भावना जीव में चाहिए
ऋषि:- जैसी आपकी आगया प्रभु
फिर ईश्वर चले जाते हैं ब्रह्मांड से कौसो दूर अपने स्थान पर
और कुछ सालो बाद ईश्वर वापस आते है देखने के लिए की ऋषि ने कितने जीव की रचना की है तो ईश्वर ने जाकर देखा तो सभी ऋषि तपस्या कर रहे है
ईश्वर:– मैने तुम सब ऋषि को एक काम सोपा था वो करने की जगह पर ध्यान मै बैठे हो
फिर सभी ऋषि ध्यान से बहार आते हैं
ऋषि:– हमें क्षमा कीजिए प्रभु लेकिन हम समझ नहीं पा रहे हैं कि हम जिव की रचना कैसे करें वह भी भावनाओ के साथ
फिर ईश्वर वहां से चले जाते हैं किसी दूसरी जगह पर और वहां जाकर ईश्वर एक जीव की रचना करते है और ईश्वर उसका नाम स्त्री रखते हैं
वह स्त्री अति सुंदर थी भावनाओं के साथ परिपूर्ण थी उस स्त्री में ईश्वर ऐसा आकर्षण डालते हैं जिस पर कोई भी मोहित हो जाए और एक अलग ही तरह की ऊर्जा और उत्तेजना स्त्री में समाहित करते हैं ईश्वर
स्त्री:– प्रणाम प्रभु आपकी वजह से जीवन मिला है बोलिए क्या आगया है
ईश्वर:– तुम्हें एक ऋषि के साथ शारीरिक संबंध बनाने होंगे
स्त्री:– लेकिन ऋषि तो बहुत विद्ववान होते हैं वह क्यों शारीरिक संबंध बनाएंगे मेरे साथ और ऋषि तो सभी संबंधों से मुक्त होते हैं
ये कहनी के बाद
प्यारे पंशी की दर्दनाख कहनी पढ़िए
ईश्वर:– क्योंकि मैंने तुम्हारे शरीर पर और तुम्हारे अंदर वो आकर्षण डाला है जिससे पुरुष प्रभावित हो जाए और ऋषि भी तो एक पुरुष है चाहें कितने भी युग क्यु ना चले जाए लेकिन स्त्री का पुरुष प्रत्येय आकर्षण और पुरुष का स्त्री प्रति आकर्षण कभी खत्म नहीं होगा आखिर में मेरी बनाई हुई दुनिया भी खत्म हो जाएगी लेकिन एक दूसरे के प्रति मोह कभी खत्म नहीं होगा अब तुम जाव ऋषि के पास
फिर स्त्री एक ऋषि के पास जाती है ऋषि स्त्री को देखते हैं और ऋषि के मन में उत्तेजना बढ़ती है स्त्री के प्रति और स्त्री ऋषि के हाथ पर हाथ रखती है ऋषि में और स्त्री में शारीरिक भावनाएं बढ़ने लगती है और दोनों में शारीरिक संबंध बनता है
और कुछ महीनो के बाद एक पुत्र का जन्म होता है
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Son |
यहां से मानव की शुरुआत होती है
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Story world's greatfull wonderful beutiful first woman|दुनियां की सबसे सुंदर स्त्री
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