इस कहानी मैं आप पढ़ेंगे की यमराज को समज नही आता है की अपना काम कैसे करे इसलिए वो ब्रह्म देव के पास जाते है और ब्रह्म देव यमराज को समझाते है और काम को ठीक से करने के लिए कुछ चीजे भी देते हैं मेरा नाम है दर्शन कहानी सुरु करते हैं
ये बात है अरबो साल पेहले की जब धरती पर नये जीव की उत्पति हो रही थी जैसे जैसे वक्त बीत रहा था धरती पर जीव भी बढ़ रहे थे
इसी बात से यमराज भी चिंतित थे कि जीव की आत्मा को कहा रखे कब आत्मा को लेना कैसे लेना है इसीलिए यमराज ब्रह्म देव के पास जाते हैं
यमराज:– ब्रह्म देव आपने मुझे आत्मा को शरीर में से लेने का और आत्मा को नया शरीर देने का काम तो सोप दिया लेकिन ये काम मेरे लिए नया है तो मैं कैसे करूँ ये काम आप मुझे समझाएँ
ब्रह्म देव:– मुझे पता था ये काम तुम्हारे लिए बहुत ही मुश्किल है
यमराज:– आपको पता था कि ये आत्मा लेने का काम मैं नहीं कर पाऊँगा तो मुझे ये काम कयू दिया
ब्रह्म देव:– विधाता ने तुम्हें पसंद नहीं किया है इस काम के लिए इसलिए तो मुझे भी लगता है कि तुम ये कार्य कर सकते हो यमराज
यमराज:– लेकिन पृथ्वी पर कितने जीव हैं कोनसे जीव की आत्मा कब निकालनी है किस समय निकालनी है कब नए जीव की उत्पत्ति के लिए आत्मा भेजनी है ये सब मैं अकेला कैसे करु मुझे बताए ब्रह्म देव
ब्रह्म देव:– यमराज मैं तुम्हारा काम आसान करने के लिए एक देव देता हूँ जो बहुत ही बुद्धिमान है चतुर है जो तुम्हारी हर मुश्किल में तुम्हारा साथ देगा
यमराज:– कौन है वो ब्रह्म देव
ब्रह्म देव:– उस देव का नाम चित्रगुप्त है वो तुम्हारी मदद करेंगे यमराज तुम्हारा काम और आसान करने के लिए मैं तुम्हें यह भी देता हूं
यमराज:– ये तो गोले है लेकिन इतने छोटे गोले मेरे किस काम के
ब्रह्म देव:– ये गोले तुम्हें अभी छोटे लग रहे हैं लेकिन यमराज ये गोले छोटे हैं नहीं सूर्य जैसे कहीं सूर्य इस गोले में समा सकते हैं
यमराज:–लेकिन ये गोले मेरे किस काम के
ब्रह्मदेव:– यमराज ये लाल गोला दिख रहा है इस गोले में वही आत्मा को रखना है जिसने बुरा काम किया हो
यमराज:– लेकिन पता कैसे चलेगा कि बुरा काम कोंनसा है
ब्रह्म देव:– धरती पर अभी इंसान का जन्म नहीं हुआ है जब इंसान का जन्म हो जाएगा तब तुम्हें पता चल जाएगा बुरा काम किसे कहते हैं अच्छा काम किसे कहते हैं
यमराज:– ब्रह्म देव अब मैं समज रहा हूँ थोड़ा बहुत और ये दूसरा गोला किस काम का है
ब्रह्म देव:-ये सफ़ेद गोले में वही आत्मा को रखना है जिसने कुछ अच्छा किया हो जिंदगी में एक बार जिसने किसके बारे में बुरा न सोचा हों
यमराज:– जी ब्रह्म देव और ये काला गोला किस काम आएगा
ब्रह्म देव:- काले गोले पर यमराज तुम उस आत्मा को रखोगे जिनका धरती पर वापस जाने का वक़्त हो गया है
चित्रगुप्त:-प्रणाम ब्रह्म देव
यमराय:– ब्रह्म देव ये कौन है
ब्रह्म देव:– यही चित्रगुप्त है जो तुम्हारी मदद करेंगे चित्रगुप्त ये यमराज है अब से तुम यमराज के साथ रहोगे
चित्रगुप्त:– जैसी आपकी इच्छा ब्रह्म देव
ब्रह्म देव:– अभी तुम दोनो को कुछ और देना बाकी है
यमराज:– क्वा बाकी रहग्या ब्रह्म देव
ब्रह्म देव:– ये लो यमराज ये तुम्हारे लिए
यमराज:-ब्रह्म देव ये तो एक रस्सी है इसका मैं कया करुंगा?
ब्रह्म देव:– रस्सी तुम्हारे सबसे ज्यादा काम आयेगी
यमराज:– लेकिन रस्सी कैसे काम आ सकती है?
ब्रह्म देव:– तुम रस्सी की मदद से अपने महल में बैठकर धरती पर किसी की भी आत्मा को अपने पास ला सकते हो
यमराज:– धन्यवाद ब्रह्म देव अब मैं अपना कार्य सररता से पूर्ण कर पाऊंगा
चित्रगुप्त:– ब्रह्म देव अभी आपने बोला था मेरे लिए भी कुछ लाए हो
ब्रह्म देव:-ये दोनो तुम्हारे लिए है
यमराज:– ये तो पुस्तक और कलम है ये किस काम आयेंगे
चित्रगुप्त:– हा ब्रह्म देव यमराज देव सही कह रहे हैं
ब्रह्म देव:– चित्रगुप्त तुम इस पुस्तक में वह सब जानकारी रखोगे कि किस आत्मा को कब बुलाना है और कब आत्मा को और कौन सी आत्मा को भेजना है और किस आत्मा को किस गोले में रखना है यह सब तुम इस पुस्तक में लिखोगे
यमराज:– आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ब्रह्म देव अब मैं अपना कार्य सर्रता से पूर्ण कर पाऊंगा
चित्रगुप्त:– धन्यवाद ब्रह्म देव इस कार्य का मुझे भागीदार बनाने के लिए
ब्रह्म देव:– अब इस कार्य की जिमेदारी तुम दोनो की है और तुम दोनो इस कार्य को अब सफलता से पूर्ण कर सकते हो
फिर यमराज और चित्रगुप्त लग जाते है अपने काम मैं
अब आप भी अपने सपने पूरे करने वाले काम मैं लग जाइए कहानी यही पूर्ण होती हैं जय यमराज.




